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मतदाता सूची विवाद: 65 लाख नाम हटे, सियासी संग्राम तेज पारदर्शिता या वोटरों को वंचित करने का आरोप?

On: November 5, 2025 5:44 PM
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मतदाता सूची
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भारत में चुनावी माहौल गर्म है, और इसी बीच बिहार की मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य में करीब 65 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जबकि आयोग का दावा है कि यह कदम 22 साल बाद शुद्धिकरण के तहत उठाया गया है ताकि फर्जी और दोहराए गए वोटर हटाए जा सकें।

चुनाव आयोग ने हाल ही में कई राज्यों में Special Intensive Revision (SIR) शुरू की है ताकि मतदाता सूची को अपडेट किया जा सके और आगामी चुनावों से पहले सूची पूरी तरह साफ रहे। इस अभियान में मृतक, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और अपात्र मतदाताओं को हटाया गया है।

65 लाख नाम हटे, विपक्ष ने उठाए सवाल

मतदाता सूची

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में हटाए गए नामों में गरीब, प्रवासी और पिछड़ी जातियों के मतदाता शामिल हैं। उनका आरोप है कि यह योजनाबद्ध ढंग से वोटरों को वंचित करने की कोशिश है ताकि सत्ता पक्ष को लाभ मिल सके। कई विपक्षी नेताओं ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की तैयारी कर ली है।

वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत, जमीनी सत्यापन और डिजिटल जांच के बाद की गई है। आयोग का दावा है कि इस बार की मतदाता सूची अपडेटिंग मॉडल बनेगी, और इससे आने वाले वर्षों में अन्य राज्यों में भी इसी तरह के सुधार किए जाएंगे।

मतदाता सूची प्रक्रिया: क्या होता है?

भारत में वोटर लिस्ट हर साल और चुनाव से पहले अपडेट की जाती है। इस प्रक्रिया में:

  • नए मतदाताओं का नाम जुड़ता है
  • पुराने, मृत, या स्थानांतरित लोगों का नाम हटाया जाता है
  • गलतियों को सुधारा जाता है
  • दावा व आपत्ति का समय दिया जाता है ताकि लोग अपने नाम की स्थिति जांच सकें

चुनाव आयोग के मुताबिक, बिहार में घर-घर सत्यापन और डिजिटल चेकिंग के बाद ही नाम हटाए गए। आयोग ने यह भी कहा है कि जिनके नाम हटे हैं, वे दावा दर्ज कर दोबारा नाम जोड़ सकते हैं।

ऑनलाइन आवेदन (Self-Registration Online)

अगर आपका नाम लिस्ट में नहीं है, आप खुद भी आवेदन कर सकते हैं:

📌 Form 6 — नया वोटर रजिस्ट्रेशन
📌 Form 7 — नाम हटाने के लिए
📌 Form 8 — सुधार/अपडेट के लिए
📌 Form 8A — पता बदलने के लिए

आवेदन कहाँ करें?

  • Election Commission of India वेबसाइट
  • Voter Helpline App
  • NVSP पोर्टल

डिजिटल पोर्टल और सुविधा

आयोग ने इसके लिए कई ऑनलाइन पोर्टल और फॉर्म उपलब्ध कराए हैं, जैसे —

  • मतदाता पोर्टल — voters.eci.gov.in
  • नया नाम जोड़ने के लिए — Form 6
  • नाम सुधार/पता बदलने के लिए — Form 8

इसके अलावा, बूथ-लेवल अधिकारी घर-घर जाकर भी दस्तावेज़ों की जांच करते हैं।

दस्तावेज़ वेरिफिकेशन

जिन डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होती है:

  • आयु प्रमाण (Birth Certificate/10th Certificate/Aadhaar)
  • पते का प्रमाण (Aadhaar/Rent Agreement/Electricity Bill/Bank Passbook)
  • हाल की फोटो

दस्तावेज़ सत्यापन के बाद नाम जोड़ा जाता है।

समाज और राजनीति पर असर

यह विवाद सिर्फ तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र और भरोसे से जुड़ा मुद्दा बन गया है। बिहार जैसे सामाजिक-राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में यह मामला चुनावी समीकरणों को सीधे प्रभावित कर सकता है।
सवाल यह भी है कि क्या यह कदम मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने के लिए है, या फिर जैसा विपक्ष दावा कर रहा है — यह चुनावी गणित बदलने की कोशिश है?

सच्चाई यही है कि मतदाता सूची जैसी बुनियादी व्यवस्था पर सवाल खड़े होना देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए चिंताजनक संकेत है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और चुनाव आयोग की पारदर्शी कार्रवाई इस विवाद की दिशा तय करेगी।

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भारत के चुनावी तंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसका मजबूत और पारदर्शी वोटिंग सिस्टम माना जाता है। ऐसे में यह जरूरी है कि मतदाता सूची में कोई भी बदलाव निष्पक्ष, साफ और भरोसेमंद तरीके से हो — ताकि हर योग्य नागरिक को मतदान का अधिकार मिले और लोकतंत्र पर लोगों का विश्वास कायम रहे।

Sumrit Shaw

Sumrit Shaw sindhkhabar.com के एक युवा और ऊर्जावान हिंदी पत्रकार व कंटेंट क्रिएटर हैं। वे निष्पक्ष और गहराईपूर्ण खबरों के लिए जाने जाते हैं। समसामयिक विषयों, राजनीति और समाजिक मुद्दों पर उनकी लेखनी हमेशा तथ्यपूर्ण व पाठकों के लिए उपयोगी रहती है।

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