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UP News: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की भारत-नेपाल सीमा पर शुक्रवार सुबह उस समय हलचल मच गई जब दो ब्रिटिश नागरिकों को रूपईढा बॉर्डर से अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। यह घटना 15 नवंबर 2025 की है और अब इस मामले ने सुरक्षा एजेंसियों, खुफिया विभाग और राजनीतिक गलियारों में कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन दो विदेशी नागरिकों को पकड़ा गया, वे खुद को डॉक्टर बताते हैं, लेकिन उनके पास न तो वैध भारतीय वीजा था और न ही उनके यात्रा का उद्देश्य संतोषजनक तरीके से स्पष्ट किया जा सका।
कैसे पकड़े गए दोनों विदेशी डॉक्टर? सीमा पर चेकिंग के दौरान खुलासा
शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे SSB के जवान बॉर्डर के पास नियमित जांच कर रहे थे। इसी दौरान एक 61 वर्षीय ब्रिटिश महिला डॉक्टर, डॉ. सुशमा कार्लिन ओलिविया, और 35 वर्षीय ब्रिटिश पुरुष डॉक्टर, डॉ. हसन अमन सलीम, नेपाल से भारत की ओर आते देखे गए। कागजों की जांच में पता चला कि दोनों के पास वैध भारतीय वीजा नहीं है। SSB को उन पर शक हुआ और उन्हें तुरंत हिरासत में लेकर विस्तृत जांच शुरू कर दी गई। पहली ही पूछताछ में स्पष्ट हो गया कि उनकी भारत में एंट्री “लीगल” नहीं थी, जिसके बाद दोनों को स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया गया।
कौन हैं गिरफ्तार दोनों ब्रिटिश डॉक्टर? एक के पास OCI कार्ड, दूसरा Pakistan-origin

जांच में खुलासा हुआ कि महिला डॉक्टर ओलिविया ब्रिटिश पासपोर्ट रखने के साथ-साथ एक OCI कार्ड भी रखती हैं। हालांकि OCI कार्ड भारत में बिना वीज़ा प्रवेश की अनुमति नहीं देता और उन्हें भारत आने के लिए वीजा की आवश्यकता थी, जो उनके पास नहीं था। दूसरी ओर, पुरुष डॉक्टर हसन अमन सलीम ब्रिटिश नागरिक हैं, लेकिन उनकी पारिवारिक जड़ें पाकिस्तान से जुड़ी बताई जाती हैं और उनका वर्तमान पता मैनचेस्टर (UK) बताया गया है। दोनों ने दावा किया कि वे नेपालगंज के एक अस्पताल के निमंत्रण पर नेपाल गए थे, लेकिन भारत आने का उद्देश्य स्पष्ट रूप से नहीं बता पाए।
भारत क्यूँ आए? जांच में नहीं मिला कोई ठोस कारण, और गहरी हुई शक की रेखाएं

जांच के दौरान दोनों डॉक्टरों ने यह बताया कि वे नेपाल में चिकित्सा कार्य के लिए आए थे। हालांकि, वे यह स्पष्ट नहीं बता पाए कि भारत में प्रवेश का उद्देश्य क्या था, और क्यों उन्होंने अधिकृत इमिग्रेशन चेकपॉइंट का उपयोग नहीं किया। पुलिस के अनुसार उनका व्यवहार संदिग्ध था और उनके सभी जवाब अस्पष्ट थे, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि इस समय यह साफ नहीं है कि यह सिर्फ एक यात्रा में की गई गलती है या इसके पीछे कोई गहरा नेटवर्क जुड़ा हुआ है।
Passport Act के तहत केस दर्ज, खुफिया एजेंसियां भी जांच में शामिल
रुपईढा पुलिस ने दोनों विदेशी नागरिकों के खिलाफ Passport Act, 1967 के तहत मामला दर्ज किया है। शुरुआती पूछताछ के बाद अब खुफिया एजेंसियां भी उनके यात्रा इतिहास, पासपोर्ट रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रेल और संपर्कों की जांच कर रही हैं। हाल ही में देश की राजधानी दिल्ली में हुए ब्लास्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियां पहले ही हाई अलर्ट पर थीं, ऐसे में सीमा पर पकड़े गए दोनों डॉक्टर अब बड़े संदिग्ध नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं या नहीं—इसकी पुष्टि की जा रही है।
सीमा सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल: क्या Nepal Border सबसे कमजोर कड़ी बन चुका है?
भारत-नेपाल सीमा को “ओपन बॉर्डर” माना जाता है, जहां दोनों देशों के नागरिक बिना वीजा-विवरण के आ-जा सकते हैं। लेकिन विदेशी नागरिकों को इस मार्ग से प्रवेश करने के लिए वीजा और कागज़ी कार्रवाई अनिवार्य होती है। इस घटना ने एक बार फिर नेपाल बॉर्डर की लापरवाही, दस्तावेज सत्यापन और सुरक्षा प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र अक्सर अंतरराष्ट्रीय अपराधियों, जासूसों और अवैध तत्वों के लिए “सॉफ्ट रूट” के रूप में इस्तेमाल होता है और इस गिरफ्तारी ने इस चिंता को फिर से उजागर कर दिया है।

जांच जारी, एजेंसियों के निशाने पर कई सवाल
पुलिस और इंटेलिजेंस टीम कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच कर रही है:
वे नेपाल क्यों पहुंचे?
नेपाल से भारत आए बिना वीजा क्यों?
क्या वे किसी मेडिकल मिशन पर थे या यह सिर्फ कवर-स्टोरी थी?
क्या भारत में उनका कोई संपर्क है?
उनका असली उद्देश्य क्या था?
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अब तक कोई भी स्पष्ट उत्तर सामने नहीं आया है, जिससे जांच और भी गहराई में जा चुकी है। दोनों को न्यायालय में पेश किया जाएगा, और आगे की पूछताछ से कई अहम खुलासे होने की उम्मीद है।




