PM Modi आज अपना 75वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूरे देश में “सेवा पखवाड़ा” का आयोजन किया है, जिसमें स्वास्थ्य शिविर, स्वच्छता अभियान और जनकल्याणकारी कार्यक्रम शामिल हैं। मोदी का जन्मदिन हमेशा से राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से खास माना जाता रहा है, लेकिन इस बार पार्टी ने इसे और व्यापक स्तर पर सेवा एवं जनसंपर्क से जोड़ दिया है।
सेवा पखवाड़ा की शुरुआत आज से हो रही है और यह दो सप्ताह तक चलेगा। इसके तहत भाजपा कार्यकर्ता स्वास्थ्य जांच शिविर लगाएंगे, रक्तदान शिविर आयोजित करेंगे, स्वच्छता अभियान चलाएंगे और महिलाओं व बच्चों से जुड़े कई कार्यक्रम करेंगे। पार्टी का दावा है कि यह केवल मोदी के जन्मदिन तक सीमित उत्सव नहीं है, बल्कि इसे लोगों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश के रूप में देखा जाना चाहिए।
मोदी का जन्मदिन देश के कई हिस्सों में विकास योजनाओं के लोकार्पण और उद्घाटन के साथ भी जुड़ गया है। प्रधानमंत्री आज मध्य प्रदेश में “स्वस्थ नारी–सशक्त परिवार” अभियान की शुरुआत करेंगे, जिसका मकसद महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना है। इसके अलावा पोषण माह के अंतर्गत कई पहल भी शुरू होंगी, जिनका सीधा असर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले परिवारों पर पड़ेगा।
सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी मोदी के जन्मदिन के अवसर पर विभिन्न योजनाओं का ऐलान किया जा रहा है। मिज़ोरम में प्रधानमंत्री पहली रेल लाइन “बैराबी–सैरांग कॉरिडोर” का उद्घाटन करेंगे, जबकि राजस्थान में 25 सितंबर को वे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र की आधारशिला रखेंगे। मुंबई में भी इस महीने के अंत तक मेट्रो 3 परियोजना के अंतिम चरण का उद्घाटन होना है। इन सब कार्यक्रमों से साफ झलकता है कि मोदी के जन्मदिन को विकास और सेवा के साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
राजनीतिक नजरिए से देखें तो भाजपा ने इसे एक बड़े जनसंपर्क अभियान का रूप दे दिया है। पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को केंद्र सरकार की योजनाओं से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। यह कदम न केवल मोदी की लोकप्रियता को और मजबूत करने का प्रयास है बल्कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए जनता के बीच भरोसा कायम करने का जरिया भी है।
हालांकि, आलोचक इसे एक तरह का राजनीतिक प्रदर्शन मान रहे हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य शिविर या स्वच्छता अभियान जैसे कार्यक्रम सराहनीय हैं, लेकिन इनकी स्थायित्व पर सवाल उठते हैं। क्या यह पहल केवल दो सप्ताह की उत्सवधर्मी गतिविधि तक सीमित रह जाएगी या इसे लगातार चलाकर वास्तविक बदलाव लाया जाएगा? यही वह बिंदु है जिस पर सरकार को ध्यान देना होगा।
इसके अलावा, बड़े प्रोजेक्ट जैसे परमाणु संयंत्र और मेट्रो परियोजनाएं विकास के संकेत तो देती हैं, लेकिन इनके सामने वित्तीय, पर्यावरणीय और सामाजिक चुनौतियां भी हैं। स्थानीय स्तर पर भूमि अधिग्रहण, फंडिंग और पर्यावरणीय मंजूरी जैसे मुद्दे इन योजनाओं को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए इन्हें केवल उद्घाटन या आधारशिला तक सीमित न रखकर समय पर पूरा करना ही सरकार की असली परीक्षा होगी।
फिर भी, यह तथ्य अस्वीकार नहीं किया जा सकता कि मोदी का जन्मदिन अब केवल व्यक्तिगत अवसर नहीं रह गया है। यह एक ऐसा आयोजन बन चुका है जिसमें राजनीति, सेवा और विकास तीनों एक साथ दिखाई देते हैं। भाजपा के लिए यह अपने नेता की छवि को और मजबूत करने का मंच है, वहीं आम लोगों के लिए यह योजनाओं और सेवाओं का सीधा अनुभव लेने का अवसर भी है।
निष्कर्षतः, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 75वां जन्मदिन न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए उत्सव का दिन है बल्कि देशभर में सेवा और विकास की नई शुरुआत का प्रतीक भी है। अब असली चुनौती यह होगी कि सेवा पखवाड़ा और नई योजनाओं को लंबे समय तक कैसे सफल बनाया जाए ताकि यह केवल राजनीतिक अवसर न रहकर वास्तव में आम जनता के जीवन को बेहतर बना सके।





