नई दिल्ली। भारत द्वारा मई 2025 में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों को हिला कर रख दिया है। इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK), पंजाब और पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में मौजूद आतंकवादी कैंपों को निशाना बनाया था। नतीजतन Jaish-e-Mohammed (JeM), Hizbul Mujahideen (HM) और Lashkar-e-Taiba (LeT) जैसे संगठनों को अपने ठिकाने बदलने पड़े। अब खुफिया रिपोर्टें बताती हैं कि ये संगठन PoK छोड़कर खैबर-पख़्तूनख्वा (KPK) प्रांत और अफगान सीमा के नज़दीकी इलाकों में नए ठिकाने बना रहे हैं।
आतंकियों का शिफ्ट: PoK से KPK की ओर
इन हमलों के बाद Jaish और Hizbul Mujahideen ने PoK में अपनी गतिविधियों को लेकर चिंता महसूस की। इस वजह से ये समूह अब PoK छोड़ कर Khyber-Pakhtunkhwa प्रदेश की ओर बढ़ रहे हैं, जहाँ पर्वतीय इलाकों की वजह से छुपने-छिपाने के ठिकानों की संभावना अधिक है।
इस शिफ्ट की प्रमुख वजह है सुरक्षा बलों द्वारा हुई सतत निगरानी और नियमित हवाई हमले, जिससे PoK के ठिकानों पर हमले बढ़ गए हैं। अब आतंकवादी संगठन ऐसी जगह खोज रहे हैं जहाँ उनकी गतिविधियाँ ध्यान से बची रह सकें।
पाकिस्तान में पुनर्निर्माण और सहायता विवाद
एक और हिंट यह है कि मुरिदके में LeT के headquarters Markaz Taiba को पुनर्निर्मित करने की योजना चल रही है, जिसे ऑपरेशन सिंदूर में ध्वस्त किया गया था। कुछ खुफिया रिपोर्टों का दावा है कि पाकिस्तान की तंत्र (सरकार या खुफिया एजेंसियाँ जैसे ISI) इस पुनर्निर्माण में शामिल हो सकती हैं और कुछ राहत या बाढ़-मुआवज़ा फंडों का उपयोग इस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है।
भारत के लिए कितना ख़तरनाक?
- सीमा सुरक्षा पर दबाव: KPK और अफगानिस्तान सीमा की ओर शिफ्ट होने का मतलब है कि आतंकवादी आसानी से अफगानिस्तान से मिल रही कट्टरपंथी ताकतों से जुड़ सकते हैं। इससे उनकी संख्या और संसाधन दोनों बढ़ सकते हैं।
- नए लॉन्च पैड का खतरा: PoK में भारतीय सुरक्षा बल लगातार निगरानी रखते हैं, लेकिन KPK के गहरे पहाड़ी क्षेत्रों में बने कैंपों को ट्रैक करना कहीं ज़्यादा मुश्किल होगा। यह भारत के लिए सीधी चुनौती है।
- हाइब्रिड नेटवर्क: आतंकवादी संगठन अब इंटरनेट, क्रिप्टोकरेंसी और सोशल मीडिया के ज़रिये फंडिंग व भर्ती पर ज़ोर देंगे। भारत को साइबर सुरक्षा में और सतर्क रहना होगा।
- लंबी सीमा पर खतरा: PoK से हटकर अफगान सीमा की ओर जाने का मतलब है कि आतंकवादी नेटवर्क भारत में घुसपैठ के लिए नई रणनीतियाँ अपनाएँगे, खासकर जम्मू-कश्मीर के इलाकों और ड्रोन के माध्यम से हथियार सप्लाई में इज़ाफा होगा।
इसका प्रभाव क्या होगा?
- जम्मू-कश्मीर पर असर: आने वाले महीनों में जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ की नई कोशिशें देखी जा सकती हैं। हालांकि भारत की सुरक्षा एजेंसियाँ पहले से अधिक सतर्क हैं, फिर भी लंबी सीमा और कठिन भौगोलिक स्थिति चुनौतीपूर्ण होगी।
- भारत-अफगान-पाक संबंधों पर दबाव: अगर आतंकवादी अफगानिस्तान की सीमा के ज़रिये सक्रिय होते हैं, तो भारत और अफगानिस्तान के बीच सुरक्षा सहयोग और मज़बूत करना होगा।
- अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की मुश्किलें: पाकिस्तान पर पहले ही आतंकियों को शह देने के आरोप लगते रहे हैं। यदि यह साबित होता है कि राहत फंड या सरकारी समर्थन से LeT और अन्य कैंपों का पुनर्निर्माण हो रहा है, तो पाकिस्तान की साख और कमजोर होगी।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद Jaish-e-Mohammed, Hizbul Mujahideen सहित अन्य आतंकवादी समूह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से खैबर-पख़्तूनख्वा (KPK) की ओर अपना बेस शिफ्ट कर रहे हैं। ये समूह PoK में बढ़ती निगरानी, हवाई हमलों और हमले के ख़तरों से बचने के लिए ऐसी जगहों को चुन रहे हैं जहाँ उनका संचालन कम खुला हो। पुनर्निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है, विशेषकर LeT के ठिकानों का, जिसे लेकर विवाद और सवाल उठे हैं कि क्या राहत/बाढ़ फंडों का दुरुपयोग हो रहा है। सामने आया है कि आतंकवादियों की रणनीति में बदलाव हो गया है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को नए प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
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