Top Country State Sports Weather Tech Auto World Business Job Education Bollywood Government Schemes Others

Navratri 2025 2nd day : माँ ब्रह्मचारिणी का स्वरूप, कथा, अवतार का कारण, महत्व और पूजा-विधि

On: September 23, 2025 9:35 PM
Follow Us:
Navratri 2025 2nd day
---Advertisement---

Navratri 2025 2nd day

Navratri 2025 2nd day :- शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन माँ दुर्गा के द्वितीय स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। “ब्रह्मचारिणी” शब्द का अर्थ है – “ब्रह्म का आचरण करने वाली” अथवा “तपस्या और संयम की देवी”। इन्हें नवदुर्गा में दूसरा स्थान प्राप्त है। माँ ब्रह्मचारिणी तप, त्याग, साधना और संयम की प्रतिमूर्ति मानी जाती हैं। ऐसा माना जाता है कि इनकी पूजा से साधक को तप, धैर्य, संयम और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है और जीवन की हर कठिनाई को सहने की शक्ति मिलती है।

माँ ब्रह्मचारिणी का स्वरूप

नवरात्रि की द्वितीया तिथि को माँ दुर्गा का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी पूजी जाती हैं।

  • उनके दाहिने हाथ में जपमाला और बाएँ हाथ में कमंडलु होता है।
  • वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जो त्याग, शांति और पवित्रता का प्रतीक है।
  • उनके चरणों में सौम्यता और मुखमंडल पर अपार तेज झलकता है।
  • उनका स्वरूप साधना, संयम और तपस्या का जीता-जागता प्रतीक है।

माँ ब्रह्मचारिणी की कथा

पुराणों में वर्णन है कि माँ ब्रह्मचारिणी पर्वतराज हिमालय की पुत्री और भगवान शिव की अर्द्धांगिनी हैं।

  • जब माँ शैलपुत्री (सती का पुनर्जन्म) ने यह निश्चय किया कि वे केवल भगवान शिव को ही अपने पति रूप में स्वीकार करेंगी, तब उन्होंने कठोर तपस्या आरंभ की।
  • उन्होंने वर्षों तक केवल फल-फूल खाकर जीवन बिताया। इसके बाद वे केवल बेलपत्र पर जीवित रहीं।
  • फिर उन्होंने जल और अन्न का त्याग कर दिया और कई वर्षों तक घोर उपवास किया।
  • इस तपस्या के चलते उनका शरीर क्षीण हो गया, किंतु उनका संकल्प अडिग रहा।

उनकी इस कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ब्रह्मा प्रकट हुए और उन्होंने आशीर्वाद दिया कि वे अपने संकल्प में सफल होंगी। अंततः माँ ब्रह्मचारिणी की तपस्या सफल हुई और उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया।

अवतार लेने का कारण और उद्देश्य

माँ ब्रह्मचारिणी ने अवतार क्यों लिया और इसका उद्देश्य क्या था?

  1. पिछले जन्म का संकल्प – सती के रूप में उन्होंने भगवान शिव को पति बनाया था, परंतु दक्षयज्ञ में आत्मदाह के बाद पुनर्जन्म लेकर उन्हें पुनः शिव को पाना था।
  2. भक्ति और संयम का आदर्श स्थापित करना – मानव समाज को यह संदेश देने के लिए कि तपस्या, संयम और दृढ़ इच्छाशक्ति से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
  3. साधना की शक्ति का प्रमाण – उन्होंने यह दिखाया कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी आस्था और साधना जीवन को सफल बनाती है।

माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-विधि

द्वितीया तिथि पर माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा निम्न प्रकार से की जाती है –

  1. प्रातः स्नान और संकल्प – स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र धारण करें और पूजा का संकल्प लें।
  2. कलश स्थापना – मिट्टी में जौ बोकर कलश रखें और दीपक जलाएँ।
  3. माँ की प्रतिमा या चित्र की स्थापना – माँ ब्रह्मचारिणी का चित्र सामने रखें।
  4. विधिवत पूजन
    • अक्षत, रोली, चंदन, धूप-दीप अर्पित करें।
    • पुष्प, विशेषकर सफेद फूल चढ़ाएँ।
    • शक्कर (चीनी) और मिश्री का भोग लगाएँ।
  5. मंत्र-जप
    “ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥”
    इस मंत्र का 108 बार जप करना श्रेष्ठ माना जाता है।
  6. आरती और प्रार्थना – पूजा के अंत में आरती करें और माँ से आत्मबल और संयम की प्रार्थना करें।

पूजा का फल और महत्व

  • माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से साधक को साहस, आत्मबल और धैर्य प्राप्त होता है।
  • विद्यार्थियों को ज्ञान, विद्या और एकाग्रता मिलती है।
  • जीवन की कठिनाइयाँ दूर होकर मार्ग प्रशस्त होता है।
  • दांपत्य जीवन में सामंजस्य और स्थिरता आती है।

आध्यात्मिक महत्व

माँ ब्रह्मचारिणी की साधना से साधक का अनाहत चक्र जागृत होता है। यह चक्र भक्ति और प्रेम का केंद्र है।

  • इससे मन में करुणा और पवित्रता आती है।
  • साधक की साधना सफल होने लगती है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
  • यह साधना आत्मसंयम और मानसिक शांति का आधार बनाती है।

ये भी पढ़ें

First day of Navratri 2025 : नवरात्रि के पहले दिन पूजे जाने वाले माँ शैलपुत्री का स्वरूप, कथा, महत्व और माँ शैलपुत्री की पूजा-विधि

प्रतीकात्मक अर्थ

  • जपमाला – भक्ति, ध्यान और साधना का प्रतीक।
  • कमंडलु – संयम, तप और साधक जीवन का प्रतीक।
  • श्वेत वस्त्र – निर्मलता और त्याग का प्रतीक।
  • सौम्य स्वरूप – आत्मबल, धैर्य और शांति का संदेश।

निष्कर्ष

नवरात्रि के दूसरे दिन पूजी जाने वाली माँ ब्रह्मचारिणी हमें यह सिखाती हैं कि कठिनाइयाँ चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, भक्ति, संयम और दृढ़ इच्छाशक्ति से सबकुछ संभव है। उनकी पूजा से जीवन में आत्मबल, ज्ञान और आध्यात्मिक शांति आती है।

Sumrit Shaw

Sumrit Shaw sindhkhabar.com के एक युवा और ऊर्जावान हिंदी पत्रकार व कंटेंट क्रिएटर हैं। वे निष्पक्ष और गहराईपूर्ण खबरों के लिए जाने जाते हैं। समसामयिक विषयों, राजनीति और समाजिक मुद्दों पर उनकी लेखनी हमेशा तथ्यपूर्ण व पाठकों के लिए उपयोगी रहती है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment