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H-1B Visa: भारतीयों को चुकाने होंगे 88 लाख रुपये, इंजीनियरों की बढ़ेंगी मुश्किलें, नुकसान किसे—अमेरिका या भारत?

On: September 21, 2025 10:26 AM
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H-1B Visa: Indians May Pay ₹88 Lakh, Tougher Times Ahead for Engineers – Who Loses More, America or India
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H-1B Visa नीति में अमेरिका ने बड़ा बदलाव किया है जो भारतीय टेक प्रोफेशनल्स, स्टार्ट-अप्स और आईटी कंपनियों के लिए अहम है। ट्रम्प प्रशासन ने घोषणा की है कि H-1B वीज़ा के नए आवेदनकर्ताओं (new applicants) पर $100,000 की नई फीस लागू होगी। यह कदम ‘skilled worker’ कार्यक्रम को फिर से निर्धारित करने की कोशिश है। लेकिन साथ ही ये भी स्पष्ट किया गया है कि इस फीस का असर मौजूदा वीज़ा धारकों या renewals पर नहीं पड़ेगा।

H-1B Visa की प्रमुख बातें जो जानना ज़रूरी है

बिंदुविवरण
फ़ीस कितना और कब लागू होगीये $100,000 फ़ीस नए H-1B आवेदनकर्ताओं पर लागू होगी। मौजूदा धारकों या उनके वीज़ा renewals पर नहीं।
नियम कब से लागू होंगेयह नियम 21 सितंबर 2025 से प्रभावी होने की सूचना है।
किसे प्रभावित करेगाटेक कंपनियाँ ऑफ़शोर्ड प्रोजेक्ट्स के लिए विदेशी कुशल कर्मचारियों (skilled professionals) को विदेश से लाती हैं, उन्हें बड़े खर्च का सामना करना पड़ेगा। भारत से H-1B वीज़ा धारकों की संख्या बहुत ज्यादा है, इसलिए असर खास होगा।
भारत सरकार की प्रतिक्रियाभारत सरकार ने इस फैसले की गंभीरता जताते हुए कहा है कि इस से भारतीय परिवारों और करियर पर “मानवीय (humanitarian) प्रभाव” हो सकता है। Industry bodies जैसे NASSCOM ने भी चेतावनी दी है कि इस तरह की महँगी फीस से टेक उद्योग की संचालन क्षमता प्रभावित होगी।

भारत पर संभावित असर

  1. भारत से आईटी एक्सपोर्ट और टेक-कंपनियों को झटका
    भारतीय कम्पनियाँ जैसे TCS, Infosys, Wipro इत्यादि अमेरिका में कुशल कर्मचारियों भेजती हैं। $100,000 फीस होने की स्थिति में ऑनशोर प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ जाएगी, कुछ प्रोजेक्ट्स पुनर्विचार के दायरे में आ सकते हैं।
  2. भविष्य की योजनाएँ प्रभावित होंगी
    जिन करियर रास्तों की योजना पहले से तैयार हो गई हो, जैसे H-1B वीज़ा के माध्यम से यू.एस. में काम करना, उन्हें संशोधित करना पड़ सकता है। युवा प्रोफेशनल्स अब यह सोचेंगे कि यह कदम उनके लिए व्यवहार्य है या नहीं।
  3. परिवारों पर दबाव
    वीज़ा शुल्क में वृद्धि और travel / re-entry नियमों के कारण परिवारों को अस्थायी या बनी-बनाई योजनाएँ बदलनी पड़ सकती हैं। अधिकारियों ने इस बात की भी चिंता जताई है कि यह परिवर्तन “मानवीय प्रभाव” उत्पन्न कर सकता है।

किसे राहत मिली है?

  • अमेरिका के प्रशासन ने साफ किया है कि मौजूदा H-1B धारकों को नई फीस से नहीं जोड़ा जाएगा।
  • साथ ही यह भी कहा गया है कि renewals या existing वीज़ा धारकों के लिए re-entry यात्रा पर नई फीस लागू नहीं होगी।
  • यानी उन लोगों को तत्काल विभ्रम में आने की ज़रूरत नहीं है जिन्होंने पहले से वीज़ा प्राप्त कर लिया है।

संभावित योजना और सुझाव

अगर आप H-1B वीज़ा पर विचार कर रहे हैं या पहले से धारक हैं, तो नीचे कुछ रणनीतियाँ काम आ सकती हैं:

  1. ऐप्लिकेशन टाइमिंग देखें
    यदि संभव हो, नए आवेदन करें इससे पहले कि नया नियम ‎पूरी तरह लागू हो जाए या अगले lottery-cycle में हो जाए।
  2. कंपनी / नियोक्ता से बातचीत करें
    यदि आप काम कर रहे हैं, अपने नियोक्ता से इस नए खर्च का अनुमान लगवाएँ। कौन संभालेगा यह देखें कि क्या कंपनी यह अतिरिक्त लागत उठाएगी या नहीं।
  3. वैकल्पिक विकल्पों की खोज करें
    अन्य वीज़ा श्रेणियाँ (जैसे OPT, अन्य देश) पर विचार करें अगर H-1B वीज़ा व्यावहारिक न हो।
  4. परिवार और लॉन्ग-टर्म योजना
    यदि परिवार को USA में ले जाने की योजना है, तो खर्च और संभावित रुकावटों को ध्यान में रखते हुए योजना बनाएं।

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H-1B वीज़ा नीति में यह बदलाव बहुत बड़ा है — $100,000 फीस बढ़ोतरी और नए आवेदनकर्ता हटाने और नया नियम लागू करने की तैयारी ने भारत और भारतीय कर्मचारियों को चिंतित कर दिया है। हालांकि, मौजूदा धारकों और renewals के मामले में राहत मिल रही है। भविष्य में यह देखना होगा कि किस तरह ये नीति कार्यान्वित होगी, कानूनी चुनौतियाँ होंगी या नहीं, और भारतीय उद्योग इसका सामना कैसे करेगा।

Sumrit Shaw

Sumrit Shaw sindhkhabar.com के एक युवा और ऊर्जावान हिंदी पत्रकार व कंटेंट क्रिएटर हैं। वे निष्पक्ष और गहराईपूर्ण खबरों के लिए जाने जाते हैं। समसामयिक विषयों, राजनीति और समाजिक मुद्दों पर उनकी लेखनी हमेशा तथ्यपूर्ण व पाठकों के लिए उपयोगी रहती है।

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