टॉप देश राज्य खेल मौसम टेक ऑटो दुनिया बिज़नेस जॉब एजुकेशन बॉलीवुड सरकारी योजना अन्य

Election Booth Security: आखिर बूथ पर सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होती है और कैसे मिलती है? जानिए पूरा प्रोसेस और योग्यता

On: November 17, 2025 11:38 AM
Follow Us:
Election Booth Security
---Advertisement---

Election Booth Security

Election Booth Security: भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में चुनाव सिर्फ वोटिंग का दिन नहीं होता, बल्कि यह एक ऐसा ऑपरेशन है जिसमें लाखों कर्मचारी, अधिकारी और सुरक्षा बल तैनात किए जाते हैं। खासकर पोलिंग बूथों पर सुरक्षा और निगरानी का प्रबंधन एक अत्यंत संवेदनशील और जिम्मेदारी-भरा काम होता है। लेकिन आम लोगों के मन में हमेशा यह सवाल रहता है कि चुनाव बूथ पर सुरक्षा की जिम्मेदारी किसे मिलती है, कैसे मिलती है और इसके लिए किन योग्यताओं की जरूरत होती है? इस रिपोर्ट में हम उसी प्रक्रिया को विस्तार से समझेंगे, बिल्कुल वैसे जैसे किसी बड़े न्यूज पोर्टल पर पढ़ने को मिलता है।

किसके हाथ में होती है बूथ पर सुरक्षा की जिम्मेदारी?

चुनाव आयोग पूरे देश में चुनाव की व्यवस्था संभालने वाला सर्वोच्च प्राधिकरण है। चुनाव बूथ की सुरक्षा और मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सीधे तौर पर कुछ प्रमुख स्तरों पर बांटी जाती है। सबसे पहले जिले में मौजूद जिला निर्वाचन अधिकारी और पुलिस प्रशासन मिलकर यह तय करते हैं कि किन बूथों को सामान्य, संवेदनशील या अतिसंवेदनशील घोषित किया जाए। उसके बाद उन स्थानों पर आवश्यकतानुसार पुलिस बल, केंद्रीय अर्धसैनिक बल और रिजर्व टीमें तैनात की जाती हैं।

पोलिंग बूथ के स्तर पर Presiding Officer की जिम्मेदारी सबसे अहम होती है। वे बूथ के मुखिया होते हैं और पूरे मतदान केंद्र की व्यवस्था को नियंत्रित करते हैं। उनके साथ Polling Officers, EVM/VVPAT ऑपरेटर और सहायक कर्मचारी तैनात होते हैं जो मतदान में मदद करते हैं। वहीं सुरक्षा के मोर्चे पर स्थानीय पुलिस, सशस्त्र पुलिस और कुछ विशेष मामलों में CRPF जैसे केंद्रीय बल मौजूद रहते हैं।

जिम्मेदारी कैसे मिलती है और नियुक्ति की प्रक्रिया कैसी होती है?

बूथ पर जिम्मेदारी मिलने की प्रक्रिया चुनाव आयोग के विस्तृत गाइडलाइन के तहत पहले से तैयार की जाती है। जब चुनाव की घोषणा होती है, तो जिला प्रशासन अपने सरकारी विभागों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत, राजस्व, आपूर्ति विभाग आदि के कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी के लिए चिन्हित करता है। इसके बाद उन्हें ट्रेनिंग दी जाती है, फील्ड विजिट कराया जाता है और बूथ का पूरा नक्शा समझाया जाता है।

सुरक्षा बलों की नियुक्ति पूरी तरह पुलिस प्रशासन और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट पर आधारित होती है। यदि किसी बूथ पर राजनीतिक तनाव, पुराने अपराध, जातिगत विवाद या धमकी की संभावनाएं हों, तो वहां अतिरिक्त बल तैनात किया जाता है। दूसरी तरफ सेक्टर अधिकारी और सेक्टर पुलिस अधिकारी कई बूथों की निगरानी करते हुए दिनभर राउंड लगाते हैं और कोई भी समस्या सीधे जिला निर्वाचन अधिकारी तक पहुंचाते हैं।

पूरे ऑपरेशन का सुपरविजन ऑब्जर्वर करते हैं जिन्हें चुनाव आयोग दिल्ली से सीधे भेजता है। ये वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारी होते हैं और किसी भी गड़बड़ी पर तुरंत हस्तक्षेप कर सकते हैं।

इन पदों के लिए क्या-क्या योग्यताएँ होती हैं?

चुनावी ड्यूटी के विभिन्न रोल के लिए अलग-अलग योग्यताएँ निर्धारित होती हैं। पोलिंग अधिकारियों के लिए यह जरूरी है कि वह केंद्र या राज्य सरकार के नियमित कर्मचारी हों। उनकी डिजिटल ट्रेनिंग, EVM/VVPAT चलाने की क्षमता और प्रशासनिक समझ को परखा जाता है। Presiding Officer अक्सर अनुभवी अधिकारी होते हैं जो पहले भी सरकारी जिम्मेदारियाँ संभाल चुके होते हैं।

सुरक्षा बलों के लिए योग्यताएँ पूरी तरह पुलिस और केंद्रीय बलों की नियमावली के अनुसार होती हैं। इन जवानों को भी चुनाव से पहले विशेष ट्रेनिंग दी जाती है जिसमें भीड़ नियंत्रण, संवेदनशील परिस्थितियों से निपटना और मतदान केंद्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है।

BLO यानी Booth Level Officer की भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण होती है। वे बूथ के शुरू होने से पहले ही महीनों तक क्षेत्र के मतदाताओं की सूची तैयार करने, सही जानकारी जुटाने और स्थानीय स्थिति समझने का काम करते हैं। BLO बनने के लिए उम्मीदवार का स्थानीय सरकारी कर्मचारी होना और क्षेत्र की जानकारी होना जरूरी है।

बूथ सुरक्षा में तकनीक की भूमिका

पिछले कुछ चुनावों में सुरक्षा और निगरानी को मजबूत करने के लिए तकनीक का प्रयोग तेजी से बढ़ा है। कई जगह बूथों पर CCTV, वेबकास्टिंग और लाइव मॉनिटरिंग की व्यवस्था की जाती है। इससे न सिर्फ मतदान में पारदर्शिता बढ़ती है बल्कि किसी भी गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई संभव हो जाती है।

क्यों जरूरी है इतनी सख्त सुरक्षा व्यवस्था?

चुनाव लोकतंत्र का सबसे बड़ा त्योहार है और इसकी पवित्रता बचाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था का पुख्ता होना जरूरी होता है। बूथ कैप्चरिंग, धमकी, हिंसा और अवैध गतिविधियां रोकने के लिए सुरक्षा बलों की मौजूदगी बेहद आवश्यक है। साथ ही, मतदाता को यह भरोसा होना चाहिए कि वह सुरक्षित माहौल में वोट डाल सकता है। यही कारण है कि चुनाव आयोग से लेकर स्थानीय प्रशासन तक सभी स्तरों पर सुरक्षा और निगरानी को उच्च प्राथमिकता दी जाती है।

ये भी पढ़ें

UP News: नेपाल से भारत में चोरी-छिपे घुसे दो Pakistani-British नागरिक गिरफ्तार

चुनाव बूथ पर सुरक्षा की जिम्मेदारी कोई साधारण काम नहीं है बल्कि कई विभागों के संयुक्त प्रयास से तैयार की गई रणनीति पर आधारित होती है। चुनाव आयोग की निगरानी, जिला प्रशासन की योजना, पुलिस बलों की तैनाती और प्रशिक्षित अधिकारी—इन सबकी संयुक्त मेहनत से हर चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से सम्पन्न होता है। योग्य अधिकारियों, अनुभवी सुरक्षा बलों और आधुनिक तकनीक के मेल से भारतीय लोकतंत्र अपनी मजबूती और पारदर्शिता को लगातार साबित करता रहता है।

Sumrit Shaw

Sumrit Shaw sindhkhabar.com के एक युवा और ऊर्जावान हिंदी पत्रकार व कंटेंट क्रिएटर हैं। वे निष्पक्ष और गहराईपूर्ण खबरों के लिए जाने जाते हैं। समसामयिक विषयों, राजनीति और समाजिक मुद्दों पर उनकी लेखनी हमेशा तथ्यपूर्ण व पाठकों के लिए उपयोगी रहती है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

शेख हसीना को मौत की सज़ा सुनाई गई

शेख हसीना को मौत की सज़ा सुनाई गई: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री पर मानवता विरोधी अपराधों का दोषसिद्धि—क्या कहा गया और अब आगे क्या होगा?

Election Booth Security

Election Booth Security: आखिर बूथ पर सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होती है और कैसे मिलती है? जानिए पूरा प्रोसेस और योग्यता

दिल्ली ब्लास्ट

दिल्ली ब्लास्ट: दिल्ली धमाके में NIA ने की पहली गिरफ्तारी लाल किले हमले में शामिल i20 कार का मालिक आमिर गिरफ्तार

UP News

UP News: नेपाल से भारत में चोरी-छिपे घुसे दो Pakistani-British नागरिक गिरफ्तार

IPL 2026 Auction

IPL 2026 Auction: जानिए कब और कहां होगा आईपीएल 2026 का मिनी ऑक्शन इस बार क्या खास होने वाला है?

सरकार ने दी बड़ी साइबर चेतावनी, आपका फोन और लैपटॉप अब खतरे में, ऐप्पल डिवाइसेज़ भी सुरक्षित नहीं

सरकार ने दी बड़ी साइबर चेतावनी, आपका फोन और लैपटॉप अब खतरे में, ऐप्पल डिवाइसेज़ भी सुरक्षित नहीं

Leave a Comment