
Earthquake in Kolkata : पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में अचानक लोगों ने भूकंप के तेज झटके महसूस किए। शुक्रवार देर रात आए इस झटके से लोग घबराकर घरों से बाहर निकल गए। जानकारी के अनुसार असम के उदलगुरी जिले में रात को रिक्टर स्केल पर 5.8 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसके असर से झटके उत्तरी बंगाल, सिलिगुड़ी और कोलकाता तक महसूस किए गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि अब तक किसी तरह के जानमाल के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है। भूकंप आने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने लिखा कि अचानक धरती हिलने लगी और पंखे तक झूलने लगे। यह झटका इतने तेज था कि लोगों को महसूस होते ही तुरंत घर से बाहर निकलना पड़ा।
भूकंप का केंद्र असम के उदलगुरी जिले में था लेकिन इसकी गहराई कम होने की वजह से असर ज्यादा दूर तक फैल गया। यही कारण है कि Earthquake in Kolkata का प्रभाव भी दिखाई दिया। रात के समय अधिकांश लोग सो रहे थे और झटके महसूस होते ही लोग भयभीत होकर बाहर निकल गए। कुछ इलाकों में लोग सड़कों पर इकट्ठा हो गए और भूकंप के डर से काफी देर तक बाहर ही रहे।
कोलकाता में Earthquake in Kolkata के इन झटकों को लेकर लोगों में दहशत का माहौल बन गया। विशेषज्ञों के मुताबिक असम और पूर्वोत्तर इलाका भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहां आए दिन हल्के-फुल्के झटके महसूस होते रहते हैं लेकिन जब तीव्रता 5 या उससे अधिक होती है तो उसका असर आसपास के राज्यों में भी दिखाई देता है। इस बार भी ऐसा ही हुआ और असम में आए भूकंप के झटके बंगाल तक पहुंचे।
भूकंप आने के तुरंत बाद राष्ट्रीय भूकंप केंद्र ने इसकी पुष्टि की। संस्थान ने जानकारी दी कि असम के उदलगुरी में भूकंप का केंद्र सतह से करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर था। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.8 दर्ज की गई। इस वजह से इसका असर सिलिगुड़ी और कोलकाता जैसे शहरों तक भी महसूस किया गया। लोग सोशल मीडिया पर लगातार लिख रहे हैं कि यह भूकंप अब तक के हाल के महीनों में सबसे ज्यादा तेज था। कई लोगों ने इसे डरावना अनुभव बताया और कहा कि झटके लंबी अवधि तक महसूस किए गए।
Earthquake in Kolkata के झटकों के बाद राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। फिलहाल किसी भी तरह की जनहानि या नुकसान की रिपोर्ट सामने नहीं आई है। लेकिन प्रशासन सतर्क है और सभी जिलों में निगरानी की जा रही है। आपदा प्रबंधन विभाग ने कहा कि यदि दोबारा झटके महसूस हों तो लोग तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि चूंकि पूर्वोत्तर क्षेत्र सिस्मिक जोन-5 में आता है, इसलिए यहां हमेशा सतर्कता बरतने की जरूरत होती है।
भूकंप के झटकों से कोलकाता में पुराने मकानों में रह रहे लोग सबसे ज्यादा डर गए। उनका कहना है कि इमारतें कमजोर हैं और अगर भूकंप और तेज होता तो हालात बिगड़ सकते थे। कई लोग देर रात तक बाहर ही खड़े रहे और वापस घरों में लौटने से कतराते रहे। इंटरनेट पर Earthquake in Kolkata तुरंत ट्रेंड करने लगा और हजारों लोगों ने अपने अनुभव साझा किए।
वैज्ञानिकों का मानना है कि लगातार बढ़ते भूकंपीय गतिविधियां एक संकेत हैं कि हमें पहले से तैयार रहना होगा। खासतौर पर कोलकाता जैसे बड़े शहरों में जहां जनसंख्या घनत्व ज्यादा है और इमारतें पुरानी हैं, वहां Earthquake in Kolkata जैसी घटनाएं बड़ा खतरा पैदा कर सकती हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि भूकंप आने की स्थिति में लोग घबराएं नहीं, तुरंत बाहर निकलें, लिफ्ट का इस्तेमाल न करें और खुले स्थान में खड़े हों।
फिलहाल Earthquake in Kolkata से किसी तरह की बड़ी क्षति की खबर नहीं है लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह याद दिला दिया है कि प्राकृतिक आपदाएं बिना किसी चेतावनी के आ सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि लोग सतर्क रहें और प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारी हमेशा बनी रहे।






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