कांग्रेस नेता राहुल गांधी के “वोट चोरी” आरोप ने देश की सियासत में तूफ़ान खड़ा कर दिया है। बुधवार को राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि कर्नाटक के आलन्द विधानसभा क्षेत्र में लगभग 6,000 वोटरों के नाम सुनियोजित तरीके से मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की गई। उन्होंने इसे “systematic deletion” बताया और आरोप लगाया कि इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी और निर्वाचन आयोग की मिलीभगत है। राहुल गांधी ने कहा कि जिन समुदायों के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है, उनमें मुख्य रूप से दलित, आदिवासी, पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यक समाज के लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र पर सीधा हमला है और उनके पास इसके 100 प्रतिशत सबूत मौजूद हैं। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के कामकाज पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें भीतर से जानकारी मिल रही है कि मतदाता सूची से नाम हटाने का कार्य एक “software manipulation” के ज़रिए किया गया। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को राहुल गांधी ने “Hydrogen Bomb” करार दिया, हालांकि विरोधियों ने इसे खोखला बताया। NDTV रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी का आरोप है कि चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ पार्टी की सांठगांठ से लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है।
राहुल गांधी के इस बयान पर बीजेपी ने करारा पलटवार किया। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी देश में लोकतंत्र को कमजोर करना चाहते हैं और जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। ठाकुर ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी भारत में वैसी स्थिति पैदा करना चाहते हैं जैसी नेपाल और बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता देखने को मिलती है। India TV की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी ने कहा कि अगर राहुल गांधी के पास सचमुच सबूत होते तो उन्हें अदालत या कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेना चाहिए, न कि मीडिया के ज़रिए देश को भड़काने की कोशिश करनी चाहिए। बीजेपी प्रवक्ताओं ने यह भी कहा कि राहुल का “Hydrogen Bomb” आखिरकार फुस्स साबित हुआ।
राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने भी प्रतिक्रिया दी है। आयोग ने उनके आरोपों को “गलत और बेबुनियाद” करार दिया। Moneycontrol की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने साफ किया कि किसी भी वोटर का नाम सीधे ऑनलाइन हटाया नहीं जा सकता। इसके लिए तय प्रक्रिया है जिसमें मतदाता को सुनवाई का अवसर देना ज़रूरी होता है। चुनाव आयोग ने यह भी माना कि 2023 में आलन्द विधानसभा क्षेत्र में कुछ ग़लत प्रयास ज़रूर हुए थे, लेकिन उन्हें समय रहते रोक लिया गया और संबंधित मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई। आयोग ने कहा कि किसी भी तरह की वोटर लिस्ट से छेड़छाड़ को गंभीरता से लिया जाएगा।
कांग्रेस के साथ-साथ अन्य विपक्षी दलों ने भी राहुल गांधी का समर्थन किया है। प्रियंका गांधी ने कहा कि यह सिर्फ कांग्रेस का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे लोकतंत्र का सवाल है। विपक्षी नेताओं ने मांग की कि चुनाव आयोग सभी डेटा सार्वजनिक करे—जैसे OTP ट्रेल, IP एड्रेस और एप्लिकेशन की कॉपी—ताकि पारदर्शिता साबित हो सके। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, विपक्ष इस मुद्दे को संसद और जनता दोनों के बीच बड़े पैमाने पर उठाने की तैयारी में है।
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राहुल गांधी के आरोपों ने देश की राजनीति में गर्मी बढ़ा दी है। बीजेपी इसे विपक्ष का हताशा भरा कदम बता रही है, वहीं राहुल गांधी और कांग्रेस इसे लोकतंत्र बचाने की लड़ाई कह रहे हैं। चुनाव आयोग ने अपनी सफाई देते हुए आरोपों को निराधार बताया है। अब देखना यह होगा कि क्या राहुल गांधी अपने वादे के मुताबिक सबूत सार्वजनिक करते हैं या यह विवाद केवल सियासी आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाता है।






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