Bihar Election Result 2025
Bihar Election Result 2025 आज साफ कर चुके हैं कि इस बार जनता ने एक बार फिर National Democratic Alliance पर भरोसा जताया है। शुरुआत से ही जारी रुझानों में एनडीए लगातार आगे रहा और दो सौ से अधिक सीटों का विशाल आंकड़ा पार करते ही यह स्पष्ट हो गया कि Bihar की राजनीति में इस बार जनता ने परिवर्तन के बजाय स्थिरता और विकास के एजेंडे को चुना है।
हालांकि यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि इस बार चुनाव का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु महिलाएं रहीं, जिन्होंने अभूतपूर्व संख्या में मतदान किया और पूरे राजनीतिक समीकरण को बदल दिया। Times of India ने बताया कि इस वर्ष कुल मतदान 66.9 प्रतिशत के आसपास रहा, जिसमें महिलाओं का मतदान पुरुषों की तुलना में काफी अधिक था।
महिलाओं की बढ़ी भागीदारी ने रचा नया इतिहास
इस बार BIhar में महिला मतदाताओं की सक्रियता ने पूरे राजनीतिक विश्लेषण को नया मोड़ दिया। Times of India के अनुसार महिलाओं की उपस्थिति पुरुषों से कहीं अधिक रही और कई जिलों में महिलाओं के मतदान का प्रतिशत ऐतिहासिक स्तर तक पहुँच गया। चुनाव आयोग के प्रारंभिक आंकड़ों से यह भी साफ हुआ कि राज्य में विकसित मतदान केंद्रों, सुरक्षा व्यवस्था और महिलाओं पर केंद्रित जागरूकता अभियानों का सीधा असर मतदान प्रतिशत पर दिखा। जब पुरुषों के मुकाबले महिलाओं ने बड़ी संख्या में वोट डाला, तब यह स्वाभाविक हो गया कि उनका मत चुनावी नतीजों को निर्णायक रूप से प्रभावित करेगा।

नीतीश कुमार और महिलाओं के बीच मजबूत भरोसा
Bihar की राजनीति में महिलाओं का समर्थन हमेशा से अहम रहा है, लेकिन इस बार यह समर्थन निर्णायक साबित हुआ। बीते वर्षों में राज्य सरकार ने महिला शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सहायता क्षेत्र में कई योजनाएं लागू कीं। अधिकांश योजनाओं का सीधा लाभ महिलाओं को मिला और यही लाभ इस बार वोट में तब्दील हो गया। Bihar के महिलाओं के सामने जब विकल्प उपस्थित हुए, तब वे उस शासन-प्रणाली की ओर झुकीं जिसने उन्हें सामाजिक-आर्थिक रूप से सशक्त किया। नीतीश कुमार का “विकास और सामाजिक सुधार” वाला मॉडल इस बार महिलाओं के लिए और अधिक स्वीकार्य रहा।
केंद्र सरकार की प्रत्यक्ष सहायता ने भी बढ़ाया विश्वास
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार Bihar चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने Bihar के महिलाओं को आठ सौ मिलियन डॉलर से अधिक की प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता ट्रांसफर की थी। इसका सीधा असर चुनावी व्यवहार पर देखने को मिला। आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं केंद्र की इन योजनाओं से सीधे तौर पर प्रभावित हुईं और उन्होंने इस योगदान को एक सकारात्मक दृष्टि से देखा। चुनावी रणनीतिकारों का मानना है कि प्रत्यक्ष लाभार्थी योजनाओं ने महिलाओं के भीतर सरकार के प्रति भरोसा बढ़ाया और इस भरोसे ने एनडीए के पक्ष में बड़े पैमाने पर वोटों को खींचा।
जातीय समीकरण में आया बड़ा बदलाव

Bihar की राजनीति वर्षों तक जातीय संतुलन पर निर्भर रही, लेकिन इस बार जो परिवर्तन सामने आए उसने परंपरागत जातीय राजनैतिक ढाँचों को चुनौती दी है। जहां पहले MY समीकरण (Muslim-Yadav) की चर्चा हावी रहती थी, वहीं इस बार ME—महिला और विशेष रूप से पिछड़ा वर्ग—सबसे अहम शक्ति के तौर पर उभरा। महिलाओं और EBC वर्ग के व्यापक समर्थन ने एनडीए को वह बढ़त दिलाई जिसने विपक्ष के पारंपरिक समीकरण को कमजोर कर दिया। यह स्पष्ट है कि इस बार जातीय गणित के बजाय विकास, कल्याण और महिलाओं की प्राथमिकताएँ चुनाव का केंद्र बनीं।
युवाओं और पहली बार वोट देने वालों का रुझान एनडीए के पक्ष में
इस चुनाव में बड़ी संख्या में युवा भी पहली बार वोट डालने पहुँचे। शिक्षा, नौकरी, माइग्रेशन और सुरक्षा जैसे मुद्दों के बीच युवाओं ने ऐसे पक्ष को प्राथमिकता दी जिसने स्थिर शासन, आर्थिक अवसर और राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत नेतृत्व का दावा किया। युवाओं के लिए केंद्र और राज्य की संयुक्त नीतियाँ आकर्षक साबित हुईं।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन राजनीतिक संवाद का असर युवाओं की सोच पर स्पष्ट देखा गया और इसका लाभ एनडीए को मिला।
विपक्ष पीछे क्यों रह गया?

विपक्ष की सबसे बड़ी समस्या यह रही कि उसकी रणनीति एक दिशा में केंद्रित नहीं थी। महागठबंधन के घटक दलों में एकजुटता दिखाने वाले अभियान कमज़ोर रहे, जिसका परिणाम सीटों के मोर्चे पर सामने आया। विपक्ष ने महिलाओं और EBC वर्ग को एकजुट करने में वह प्रभाव नहीं दिखाया जो अपेक्षित था। साथ ही, विकास और स्थिरता जैसे मुद्दों पर वह जनता के बीच भरोसा स्थापित करने में पीछे रह गया। कुछ क्षेत्रों में वोट-शेयर बढ़ने के बावजूद सीटें नहीं मिलने का कारण विपक्ष की कमज़ोर बूथ-लेवल तैयारियों को माना जा रहा है।
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अब आगे क्या?
अब यह स्पष्ट हो चुका है कि एनडीए दो सौ से अधिक सीटों के साथ सरकार बनाने जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कैबिनेट का गठन किस प्रकार होता है और कौन-कौन महत्वपूर्ण मंत्रालय संभालता है। महिलाओं पर केंद्रित योजनाओं को और मजबूती देने की संभावना भी बढ़ गई है क्योंकि इस बार महिलाओं के वोट ने गठबंधन की जीत में निर्णायक भूमिका निभाई है। सरकार के सामने चुनौती अब इस भरोसे को बनाए रखने और विकास के मॉडल को जमीन पर और असरदार तरीके से लागू करने की है।





