Bihar exit polls 2025
Bihar की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में है। विधानसभा चुनाव के (Bihar exit polls 2025) एग्जिट पोल्स सामने आते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। लगभग सभी सर्वे एजेंसियों के अनुमान बताते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस (NDA) एक बार फिर सत्ता में लौट सकता है। वहीं महागठबंधन (MGB), जो आरजेडी और कांग्रेस के नेतृत्व में लड़ा, इस बार पीछे छूटता दिखाई दे रहा है।
NDA को एग्जिट पोल्स में स्पष्ट बढ़त, महागठबंधन को झटका

राज्यभर में हुए चुनाव के बाद कई एग्जिट पोल्स ने NDA को बहुमत से भी ज्यादा सीटें मिलने का अनुमान जताया है।
Matrize के सर्वे के अनुसार NDA को 147 से 167 सीटें मिल सकती हैं, जबकि महागठबंधन को सिर्फ 70 से 90 सीटें मिलने की संभावना है।
P-Marq के आंकड़े भी कुछ इसी तरह हैं, जिसमें NDA को 142 से 162 और महागठबंधन को 80 से 98 सीटों के बीच दिखाया गया है।
People’s Pulse ने अपने अनुमान में NDA को 133 से 159 सीटें दी हैं, वहीं MGB को 75 से 101 सीटों के बीच रखा गया है।
सबसे चौंकाने वाला अनुमान Poll Diary एजेंसी ने दिया है। उसने NDA को 184 से 209 सीटें मिलने की भविष्यवाणी की है, जो सीधी-सीधी एकतरफा जीत का संकेत देती है। दूसरी तरफ Polstrat ने कुछ संतुलित आंकड़े जारी किए हैं — जिसमें NDA को 133 से 148 सीटें और महागठबंधन को 87 से 102 सीटें मिलने का अनुमान है।
बीजेपी और जेडीयू की जोड़ी फिर मैदान में, तेजस्वी की चुनौती कमजोर पड़ती दिखी
अगर पार्टीवार बात करें तो Matrize के अनुसार बीजेपी को 65 से 73 सीटें, जेडीयू को 67 से 75, आरजेडी को 53 से 58 और कांग्रेस को 10 से 12 सीटें मिलने की संभावना है।
ये आंकड़े बताते हैं कि जेडीयू और बीजेपी की जोड़ी ने इस बार भी ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में अपना मजबूत पकड़ बनाए रखा है।
वहीं आरजेडी, जो तेजस्वी यादव के नेतृत्व में इस चुनाव में “परिवर्तन की लहर” का दावा कर रही थी, लगता है उस लहर को सही दिशा नहीं दे पाई।
तेजस्वी यादव की युवाओं के बीच लोकप्रियता भले बढ़ी हो, लेकिन वोटों में उसका असर सीमित दिख रहा है।
कांग्रेस का प्रदर्शन भी औसत ही रहा, जो महागठबंधन के लिए चिंता का विषय है।
नीतीश कुमार की साख बरकरार, पीएम मोदी की लोकप्रियता भी बनी बड़ी ताकत

विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार की “विकास और सुशासन” की छवि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के साथ मिलकर NDA को बढ़त दिला रही है।
बीजेपी ने इस चुनाव में केंद्र की योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्जवला और पीएम किसान सम्मान निधि को अपनी मुख्य ताकत बनाया।
इन योजनाओं का असर ग्रामीण बिहार में स्पष्ट रूप से दिखा, जहां महिलाओं और किसानों के बीच NDA के लिए सकारात्मक रुझान मिले।
नीतीश कुमार का अनुभव और प्रशासनिक पकड़ भी मतदाताओं को भरोसा देती रही है।
बीते दो दशकों में बिहार में उनकी छवि एक ऐसे नेता की बनी है जिसने राज्य को अंधेरे से विकास की राह पर लाया।
यही कारण है कि एग्जिट पोल्स में एक बार फिर जनता का भरोसा उनके नाम पर दिखाई दे रहा है।
महागठबंधन ने पोल्स को बताया ‘प्रोपेगेंडा’, असली नतीजे 15 नवंबर को

महागठबंधन के नेताओं ने एग्जिट पोल्स को पूरी तरह खारिज किया है।
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा, “यह सब पेड सर्वे हैं, जो सत्ताधारी दल के प्रचार के लिए बनाए गए हैं। असली जनादेश 15 नवंबर को आएगा।”
कांग्रेस ने भी इसी तरह की प्रतिक्रिया दी और कहा कि बिहार के मतदाता इस बार बदलाव के पक्ष में वोट कर चुके हैं, बस अब उसे गिनती में आने का इंतजार है।
वहीं एनडीए के खेमे में आत्मविश्वास झलक रहा है।
बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि जनता ने विकास और स्थिरता को चुना है, और एग्जिट पोल उसके शुरुआती संकेत हैं।
कम वोटिंग पर भी छिड़ी राजनीतिक बहस
इस चुनाव में एक दिलचस्प पहलू यह रहा कि मतदान प्रतिशत पिछले विधानसभा चुनावों की तुलना में करीब तीन प्रतिशत कम रहा।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कम वोटिंग दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग मायने रखती है।
विपक्ष कह रहा है कि कम वोटिंग जनता की “उदासीनता” को दर्शाती है, जबकि NDA का दावा है कि यह “साइलेंट वोटर” का समर्थन है जो खुलकर नहीं बोलता लेकिन मतदान के समय NDA के पक्ष में जाता है।
जनसुराज पार्टी का असर सीमित, प्रशांत किशोर की रणनीति नहीं चली

राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की नई पार्टी जनसुराज पार्टी (JSP) भी इस चुनाव में किस्मत आजमा रही थी।
लेकिन लगभग सभी एग्जिट पोल्स में JSP का प्रदर्शन बेहद कमजोर दिख रहा है।
अधिकांश सर्वे में इसे 0 से 5 सीटों के बीच ही सीमित बताया गया है।
इससे साफ है कि जनता ने अभी उन्हें एक मुख्य विकल्प के रूप में स्वीकार नहीं किया है।
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नतीजों का इंतजार, लेकिन माहौल NDA के पक्ष में
एग्जिट पोल्स के इन नतीजों से बिहार की राजनीति में उत्सुकता और बढ़ गई है।
सभी निगाहें अब 15 नवंबर पर टिकी हैं, जब मतगणना के बाद असली तस्वीर सामने आएगी।
हालांकि इतिहास गवाह है कि कई बार एग्जिट पोल्स के अनुमान गलत भी साबित हुए हैं।
2015 और 2020 के चुनावों में भी ऐसा हुआ था जब एग्जिट पोल्स ने कुछ और दिखाया और नतीजे कुछ और निकले।
लेकिन इस बार माहौल अलग है।
नीतीश कुमार और बीजेपी की जोड़ी को जनता ने फिर मौका दिया तो यह एक राजनीतिक वापसी होगी, जबकि तेजस्वी यादव के लिए यह परिणाम आने वाले वर्षों की रणनीति तय करेगा।
फिलहाल, Bihar की सियासत अपने निर्णायक मोड़ पर है।
एग्जिट पोल्स का रुझान स्पष्ट तौर पर NDA की ओर इशारा कर रहा है, लेकिन जनता के असली फैसले तक यह मुकाबला अधूरा है।
क्योंकि बिहार में राजनीति कभी भी आखिरी मिनट में करवट बदल सकती है — और यही इस राज्य की सियासत की सबसे बड़ी खूबसूरती है।





