लाल किला के पास हुए धमाके
नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला के पास हुए धमाके ने पूरे शहर को दहला दिया। भीड़भाड़ वाले पुराने दिल्ली क्षेत्र में मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के बाहर खड़ी एक कार अचानक आग के गोले में तब्दील हो गई। यह घटना उस समय हुई जब सैकड़ों लोग रोज़ाना की तरह लाल किले और उसके आसपास के बाजारों में मौजूद थे। विस्फोट की आवाज़ इतनी तेज़ थी कि आसपास के इलाके में अफरातफरी मच गई, कई वाहन आग की लपटों में घिर गए और लोग अपनी जान बचाने के लिए दौड़ पड़े। पुलिस और दमकल विभाग को मौके पर पहुंचने में मुश्किल से कुछ ही मिनट लगे, लेकिन तब तक कई गाड़ियाँ जल चुकी थीं।
घटना की शुरुआत कैसे हुई
करीब शाम 6:52 बजे जब ट्रैफिक सिग्नल पर गाड़ियाँ रुकी हुई थीं, तभी एक Hyundai i20 कार से अचानक विस्फोट हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पहले धुएं का गुबार उठा और उसके कुछ ही सेकंड में जबरदस्त धमाका हुआ। धमाके के बाद कार में आग लग गई और पास खड़ी छह अन्य गाड़ियाँ भी आग की लपटों में समा गईं। आसपास के घरों और दुकानों की खिड़कियों के शीशे टूट गए। कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए और पास से गुजर रहे ई-रिक्शा और बाइक सवार ज़मीन पर गिर पड़े। पुलिस ने तुरंत इलाका खाली कराया और फायर ब्रिगेड ने करीब 30 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
मौतें, घायल और पहली प्रतिक्रिया
अब तक की पुष्टि के अनुसार 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 से ज़्यादा घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को एलएनजेपी, जीबी पंत और सब्ज़ी मंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कई की हालत गंभीर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना पर शोक व्यक्त किया है और गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ बैठक की। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जनता से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है।
कार और उसके मालिक की गुत्थी
सबसे बड़ा सवाल यही है कि वह कार किसकी थी और उसमें विस्फोट कैसे हुआ। जांच में पता चला है कि कार का रजिस्ट्रेशन गुरुग्राम निवासी मोहम्मद सलमान के नाम पर था। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की, जहां उसने बताया कि यह कार उसने कुछ महीने पहले एक अन्य व्यक्ति को बेच दी थी। उस व्यक्ति का नाम तारिक अहमद बताया जा रहा है, जो जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले का रहने वाला है। अब जांच एजेंसियाँ यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस वाहन का कोई लिंक किसी आतंकी संगठन से है या यह सिर्फ एक तकनीकी दुर्घटना थी।
दिल्ली पुलिस के अनुसार कार के अंदर से लाइव बुलेट और कुछ जले हुए धातु के टुकड़े मिले हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। यह सुराग जांच को साधारण हादसे से आगे ले जाकर संभावित साजिश की दिशा में मोड़ रहा है।
क्या यह आतंकी हमला है या हादसा?
विस्फोट के बाद कई अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ अधिकारियों का मानना है कि यह सीएनजी लीक से हुआ ब्लास्ट भी हो सकता है, क्योंकि पुराने मॉडल की गाड़ियों में ऐसा खतरा रहता है। लेकिन मौके से बरामद गोली और विस्फोट के स्वरूप ने इसे संभावित आतंकी घटना के रूप में भी देखा जाने लगा है। हालांकि, अब तक किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है। गृह मंत्रालय ने इस घटना को “सभी संभावनाओं के तहत जांचने योग्य मामला” घोषित किया है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) की टीमें अब तक घटनास्थल पर तीन बार दौरा कर चुकी हैं। कार के मलबे को पूरी तरह से सील किया गया है और उसके ईंधन टैंक, वायरिंग, और अंदरूनी डिवाइस की तकनीकी जांच की जा रही है।
जांच कहाँ तक पहुँची
फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार विस्फोट में प्रयुक्त रासायनिक घटक सामान्य ऑटोमोबाइल आग से अलग पाए गए हैं। इससे संदेह गहराता है कि यह महज़ इंजन-लीक या गैस-रिलीज़ नहीं थी। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने इस घटना को UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) की धाराओं के तहत भी जांच में शामिल किया है। इस बीच, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश पुलिस से भी सहयोग मांगा गया है ताकि कार के मालिकों और खरीद-फरोख्त की श्रृंखला को ट्रैक किया जा सके।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि “हम किसी भी संभावना को खारिज नहीं कर रहे। कार कई बार हाथ बदल चुकी है, और हमें हर लेनदेन की तिथि और पहचान की जांच करनी है। विस्फोट के प्रकार से लगता है कि इसे योजना बनाकर किया गया हो सकता है।”
दिल्ली और NCR में सुरक्षा के हालात
घटना के बाद दिल्ली-एनसीआर में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया है। सभी ऐतिहासिक और भीड़भाड़ वाले इलाकों — जैसे जामा मस्जिद, इंडिया गेट, अक्षरधाम मंदिर और रेलवे स्टेशन — पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मेट्रो स्टेशनों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और हर वाहन की तलाशी ली जा रही है। गृह मंत्रालय ने राज्यों को भी चेताया है कि आने वाले कुछ दिनों तक किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर कड़ी नज़र रखी जाए।
लोगों में दहशत और सवाल
दिल्ली में लाल किला सिर्फ एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं बल्कि राष्ट्रीय प्रतीक है — और इसके पास इस तरह का विस्फोट सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा झटका है। लोगों में यह सवाल गूंज रहा है कि इतने संवेदनशील इलाके में कोई विस्फोटक कैसे पहुँच गया? क्या यह सुरक्षा चूक थी या सुनियोजित हमला? सोशल मीडिया पर वीडियो और अफवाहें तेजी से फैल रही हैं, जिनसे भ्रम बढ़ रहा है। हालांकि पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।
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आगे क्या होगा
जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आने में समय लगेगा। NIA और दिल्ली पुलिस दोनों समानांतर जांच कर रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले हफ्ते में फॉरेंसिक रिपोर्ट, CCTV फुटेज और मोबाइल डेटा एनालिसिस के बाद पूरी सच्चाई सामने आ सकती है। अगर यह साबित होता है कि यह आतंकी घटना थी, तो यह दिल्ली की सुरक्षा नीति के लिए एक बड़ा झटका होगा और 2025 के राष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य को हिला सकता है।
फिलहाल, यह कहना गलत नहीं होगा कि यह विस्फोट राजधानी के दिल में एक डर और असमंजस की लहर छोड़ गया है। लाल किला, जो स्वतंत्रता का प्रतीक माना जाता है, अब जांच और सुरक्षा के घेरे में है। पुलिस, खुफिया एजेंसियाँ और फॉरेंसिक टीम सभी एक ही सवाल के जवाब की तलाश में हैं — क्या यह हादसा था, या किसी ने देश की राजधानी को एक संदेश देने की कोशिश की?





