आजम खान
उत्तर प्रदेश की सियासत में आजम खान की हालिया रिहाई ने राजनीतिक पटल पर हलचल मचा दी है। लगभग दो साल जेल में रहने के बाद उन्हें 23 सितंबर 2025 को सीतापुर जेल से रिहा किया गया। इसके तुरन्त बाद न केवल राजनीतिक पार्टियों में तर्क-वितर्क तेज हुए, बल्कि यह रिहाई कई सवाल भी खड़े करती है — “क्या यह बदलाव लेकर आएगी?”, “उनकी वापसी का असर किस दिशा में जाएगा?” आदि।
आरोप
आजम खान पर दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं — ज़मीन कब्ज़ा, आपराधिक साज़िश, नफरत बयानी (hate speech) जैसे आरोप शामिल हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इनमें से कई आरोप राजनैतिक प्रेरणा से दर्ज कराए गए थे। रिहाई के बाद उनकी भूमिका और सक्रियता पर तरह-तरह की अटकलें तेज हो गई हैं।
उनकी रिहाई को लेकर प्रमुख राजनीतिक दलों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। समाजवादी पार्टी (SP) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे न्याय व्यवस्था पर जनता के विश्वास की पुष्टि बताया। उन्होंने कहा कि “हर झूठ की एक सीमा होती है, और आरोप समय के साथ खुल जाते हैं।” The Times of India+1
वहीं, बीजेपी और अन्य विरोधी दलों ने इस रिहाई को लेकर सवाल खड़े किए। BJP के Rampur MLA ने यह आरोप लगाया कि आजम खान ने पिछड़ी, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों का शोषण किया। The Times of India
इसके अतिरिक्त, नंदकिशोर गुर्जर जैसे अन्य नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि “मर्डर मामले में भी बेल मिल जाती है” — और इसे आजम की रिहाई से जोड़ दिया। Navbharat Times
2. राजनीतिक अटकलें और गठबंधन संभावनाएँ
आजम खान की रिहाई के बाद सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या वे SP में वापस लौटेंगे या किसी अन्य दल से जुड़ेंगे। खासकर बहुजन समाज पार्टी (BSP) में शामिल होने की अटकलें मजबूत हो गई हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि उनकी पत्नी तज़ीन फातिमा की मायावती से दिल्ली में मुलाकात ने इन अटकलों को हवा दी है। The Times of India+2Navbharat Times+2
हालाँकि आजम खान ने अभी तक स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा कि वे BSP में जाएंगे या नहीं। उन्होंने कहा कि फिलहाल वे स्वास्थ्य उपचार पर ध्यान देंगे और आगे की घोषणा बाद में करेंगे। The Times of India+1
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यदि आजम खान BSP में शामिल हो जाते हैं, तो इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोटों पर उनके प्रभाव को BSP दिशा दे सकती है। लेकिन यह सवाल भी उठता है कि उन्हें उस दल में किस पद पर रखा जाएगा, क्योंकि BSP नेतृत्व पहले से ही मजबूत है। The Times of India+2Navbharat Times+2
3. यूपी की राजनीति पर संभावित प्रभाव
- मुस्लिम वोट बैंक में बदलावा — आजम खान मुस्लिम राजनीति के एक प्रभावशाली चेहरे हैं। उनकी वापसी से मुस्लिम मतदाताओं की ध्रुवीकरण और सक्रियता बढ़ने की संभावना है।
- SP को मजबूती या चुनौती? — यदि आजम SP में ही रहते हैं और सक्रिय भूमिका निभाएँ, तो वह पार्टी की पकड़ को मजबूत कर सकते हैं। लेकिन यदि वे अलग जाते हैं, तो SP को वोट बैंक में कमी का सामना करना पड़ सकता है।
- BSP को नया दिशा — अगर वे BSP से जुड़े, तो मायावती को मुस्लिम समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।
- राजनीतिक माहौल में अस्थिरता — इस तरह की घटनाएँ अक्सर गठबंधन समीकरणों को बदल देती हैं, नए राजनीतिक समीकरण बनाते हैं और पुरानी राजनीतिक धारणाओं को चुनौती देती हैं।
4. चुनौतियाँ और जोखिम
- आजम खान अभी भी मुकदमों का सामना कर रहे हैं, और उनकी रिहाई बेल पर है। इसका मतलब यह है कि अदालतों में लंबी लड़ाई अभी बाकी है।
- विपक्ष और विरोधी दल उन्हें घेरने की रणनीति अपना सकते हैं — ऐसे आरोप और बयान सामने आ सकते हैं जो राजनीतिक क्षति पहुँचा सकते हैं।
- अगर उनके कदम सही समय पर और रणनीतिक दृष्टि से न हों, तो राजनीतिक विरोधियों को उन्हें निशाना बनाने का अवसर मिल सकता है।
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निष्कर्ष
आजम खान की जेल से रिहाई सिर्फ एक घटना नहीं बल्कि यूपी की राजनीति में संभावित बदलाव का संकेत है। यह देखना दिलचस्प होगा कि वे किन राजनीतिक रास्तों को चुनते हैं — SP में पुनरागमन, BSP का दामन थामना या कोई अन्य विकल्प। उनके निर्णयों से अगले विधानसभा चुनावों की दिशा तय हो सकती है।





