काठमांडू/नई दिल्ली:
नेपाल इस समय बड़े राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल से गुजर रहा है। राजधानी काठमांडू और आसपास के जिलों में लगाए गए कर्फ्यू में अब आंशिक ढील दी गई है। हालात संभलने लगे हैं, लेकिन रात के समय प्रतिबंध अब भी लागू है।
कर्फ्यू की स्थिति
Nepal News: सुरक्षा हालात काबू में आने के बाद सरकार ने दिन का कर्फ्यू हटा दिया है। अब लोग सुबह से शाम तक सामान्य गतिविधियाँ कर सकते हैं। हालांकि, रात 7 बजे से सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू अभी भी जारी है। सेना और सुरक्षा बल सड़कों पर मौजूद हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। बीते कुछ दिनों में हिंसा के दौरान 51 लोगों की जान जा चुकी है, जिससे प्रशासन अभी भी अलर्ट पर है।
प्रदर्शन और जनआक्रोश
नेपाल में हालिया संकट की शुरुआत सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के फैसले से हुई। सरकार के इस कदम ने युवाओं को भड़का दिया और ‘Gen Z आंदोलन’ का रूप ले लिया। हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और उन्होंने बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और राजनीतिक परिवारवाद के खिलाफ नारे लगाए। स्थिति बिगड़ने पर कई जगह सरकारी इमारतों को निशाना बनाया गया, जिससे हालात और गंभीर हो गए। प्रदर्शन इतना उग्र हुआ कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सेना को कर्फ्यू लगाना पड़ा।
नई प्रधानमंत्री
इन्हीं हालातों में प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने संसद भंग कर दी और पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया। यह नेपाल के इतिहास का बड़ा क्षण है क्योंकि कार्की देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी हैं।
सुशीला कार्की अपनी सख्त और निष्पक्ष छवि के लिए जानी जाती हैं। न्यायपालिका में रहते हुए उन्होंने कई अहम फैसले दिए, जिससे वह आम जनता के बीच ईमानदार और सशक्त नेता के रूप में जानी जाती हैं। उनकी पढ़ाई भारत के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से हुई है, इसलिए भारत-नेपाल संबंधों को लेकर उनसे विशेष उम्मीदें की जा रही हैं।
भारत ने भी उनके पद संभालने पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई देते हुए कहा कि भारत हमेशा नेपाल की शांति, स्थिरता और प्रगति के साथ खड़ा रहेगा। विदेश मंत्रालय ने भी साफ किया कि नई अंतरिम सरकार के साथ मिलकर लोकतांत्रिक साझेदारी को और मजबूत किया जाएगा।
आगे की राह
अब नेपाल की अंतरिम सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है जनता का विश्वास जीतना और मार्च 2026 में होने वाले आम चुनाव तक स्थिरता बनाए रखना। बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं पर काबू पाना और युवाओं को विश्वास में लेना नई सरकार के लिए सबसे अहम कार्य होगा।






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