Mark Zuckerberg का रिकॉर्ड
दुनिया भर में जब भी युवा अरबपतियों की बात होती है, तो ज़्यादातर लोगों के ज़ेहन में फेसबुक के संस्थापक Mark Zuckerberg का नाम आता है, जिन्होंने मात्र 23 वर्ष की उम्र में अब्जाधीश (अरबपति) बनकर इतिहास रचा था। लेकिन अब दो भारतीय मूल के अमेरिकी युवाओं ने Mark Zuckerberg के इस रिकॉर्ड को तोड़ते हुए नई मिसाल पेश की है। 22 वर्ष की उम्र में ही अदर्श हिरेमठ और सूर्या मिधा ने यह कमाल कर दिखाया है और दुनिया के सबसे युवा स्वयं-निर्मित अरबपति बन गए हैं। उन्होंने अपने स्टार्टअप “Mercor” के ज़रिए ऐसी ऊँचाइयाँ हासिल की हैं जो अब तक सिलिकॉन वैली में Mark Zuckerberg जैसे केवल दिग्गज उद्यमियों के हिस्से में आती थीं।
आदर्श हिरेमठ और सूर्या मिधा अपने हाई स्कूल के दोस्त ब्रेंडन फूडी के साथ दुनिया के सबसे कम उम्र के सेल्फ-मेड अरबपति बन गए हैं। इनमें आदर्श हिरेमठ और सूर्या मिधा भारतवंशी हैं। इन्होंने मेटा (फेसबुक) के को-फाउंडर Mark Zuckerberg को पीछे छोड़ दिया है। Mark Zuckerberg 23 साल की उम्र में इस मुकाम पर पहुंचे थे।
कौन हैं अदर्श हिरेमठ और सूर्या मिधा
अदर्श हिरेमठ और सूर्या मिधा दोनों भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक हैं। अदर्श का पारिवारिक संबंध भारत के कर्नाटक राज्य से है, जबकि सूर्या मिधा का परिवार दिल्ली से अमेरिका जाकर बस गया था। दोनों की परवरिश अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के सैन जोस और माउंटेन व्यू इलाकों में हुई। यही वह जगह थी जहाँ इन दोनों की दोस्ती की शुरुआत हुई। दोनों ने एक ही स्कूल, Bellarmine College Preparatory से अपनी पढ़ाई की, जहाँ से उन्होंने न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता हासिल की बल्कि विचारों और सपनों की दिशा भी तय की।
अदर्श ने आगे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई शुरू की थी, लेकिन कॉलेज छोड़कर उन्होंने अपना पूरा ध्यान अपने स्टार्टअप पर केंद्रित कर दिया। वहीं सूर्या मिधा ने जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से विदेशी अध्ययन (Foreign Studies) में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और उसके बाद उद्यमिता की दुनिया में कदम रखा। दोनों युवाओं की सोच शुरू से ही पारंपरिक करियर से अलग थी — वे ऐसा कुछ करना चाहते थे जो तकनीक के ज़रिए दुनिया में बदलाव ला सके।
ऐसे शुरू हुई Mercor की कहानी
Mercor की शुरुआत 2023 में हुई, जब अदर्श, सूर्या और उनके तीसरे साथी ब्रेंडन फूडी ने मिलकर एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म बनाने का विचार किया जो दुनियाभर के प्रतिभाशाली प्रोग्रामर्स, डेवलपर्स और टेक विशेषज्ञों को अमेरिकी कंपनियों से जोड़े। शुरुआती विचार यह था कि वैश्विक स्तर पर रिमोट टैलेंट को अवसर दिलाया जाए। लेकिन बाद में इस कंपनी ने अपनी दिशा बदलते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में प्रवेश किया और “Human-in-the-loop” मॉडल पर काम शुरू किया।
इस मॉडल के तहत Mercor उन कंपनियों को सेवाएँ प्रदान करता है जो एआई मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए मानव विशेषज्ञों की सहायता लेती हैं। यह एक तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र है, जहाँ एआई को और सटीक और बुद्धिमान बनाने के लिए इंसानों की समझ और निर्णय-क्षमता का उपयोग किया जाता है। इसी नवाचार ने Mercor को सिलिकॉन वैली में एक बड़ी पहचान दिलाई।
ऐसी बनी कंपनी अरबों डॉलर की
Mercor ने 2024 के अंत तक कई निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। कंपनी ने हाल ही में 350 मिलियन डॉलर की फंडिंग हासिल की, जिससे उसका मूल्यांकन लगभग 10 अरब डॉलर तक पहुँच गया। इस फंडिंग राउंड के बाद कंपनी के तीनों संस्थापक अरबपति बन गए। प्रत्येक के पास लगभग 22 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो उन्हें दुनिया के सबसे युवा स्वयं-निर्मित अरबपतियों की सूची में शामिल करती है।
यह वही रिकॉर्ड है जो अब तक फेसबुक के संस्थापक Mark Zuckerberg के नाम था। Mark Zuckerberg 23 वर्ष की उम्र में अरबपति बने थे, जबकि अदर्श और सूर्या ने 22 वर्ष की उम्र में ही यह मुकाम हासिल कर लिया। और Mark Zuckerberg को पीछे छोड़ दिया। इससे न केवल उन्होंने इतिहास रचा बल्कि यह भी दिखा दिया कि नई पीढ़ी में कितना दमखम है कि वह तकनीक और नवाचार के बल पर वैश्विक स्तर पर नेतृत्व कर सकती है।
थील फेलोशिप से मिली प्रेरणा
अदर्श और सूर्या दोनों “Thiel Fellowship” के सदस्य रहे हैं। यह प्रोग्राम PayPal के सह-संस्थापक पीटर थील द्वारा शुरू किया गया था, जो उन युवाओं को 100,000 डॉलर की राशि देता है जो कॉलेज छोड़कर अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं। इस फेलोशिप ने दोनों को वित्तीय सहायता और मेंटोरशिप दी, जिससे उन्होंने अपने विचारों को हकीकत में बदलने की हिम्मत पाई। हार्वर्ड और जॉर्जटाउन जैसी यूनिवर्सिटियों को छोड़ना कोई आसान निर्णय नहीं था, लेकिन दोनों ने अपने सपनों पर भरोसा किया और आज उनका वही विश्वास दुनिया के लिए एक उदाहरण बन गया है।
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भारत और एआई की बढ़ती भूमिका
अदर्श और सूर्या की यह सफलता भारत की बढ़ती तकनीकी ताकत और प्रतिभा का भी प्रतीक है। भारतीय मूल के युवाओं ने अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में पहले भी अपनी छाप छोड़ी है — चाहे वह सुंदर पिचाई हों, सत्या नडेला हों या अब ये दो नए नाम। इन दोनों की कहानी यह दिखाती है कि भारतीय मूल की अगली पीढ़ी अब केवल बड़े संगठनों में काम नहीं कर रही, बल्कि नई कंपनियों की स्थापना कर रही है जो भविष्य की दिशा तय करेंगी।
Mercor का फोकस भी भारत जैसे देशों के प्रतिभाशाली डेवलपर्स को अवसर देना है ताकि वैश्विक तकनीकी इकोसिस्टम में अधिक से अधिक लोग शामिल हो सकें।





