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शेख हसीना को मौत की सज़ा सुनाई गई: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री पर मानवता विरोधी अपराधों का दोषसिद्धि—क्या कहा गया और अब आगे क्या होगा?

On: November 18, 2025 10:33 AM
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शेख हसीना को मौत की सज़ा सुनाई गई
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शेख हसीना को मौत की सज़ा सुनाई गई

शेख हसीना को मौत की सज़ा सुनाई गई: बांग्लादेश की विशेष ट्रिब्यूनल अदालत ने 17 नवंबर 2025 को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोपों में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई। यह अनुकरणीय और नाजुक फैसला अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर तुरंत चर्चा का विषय बन गया। अदालत ने यह फैसला उस व्यापक जांच और सुनवाई के बाद सुनाया जो 2024-25 में देश में हुए बड़े नागरिक आंदोलन और उसके दमन से जुड़ी घटनाओं की पड़ताल पर आधारित थी (Al Jazeera, 17 November 2025; NDTV, 17 November 2025).

आरोप किन आधारों पर तय किए गए?

ट्रिब्यूनल के आदेश के अनुसार मुकदमे की जांच में अदालत ने पाया कि 2024 में फैले विरोध प्रदर्शन के दौरान राज्य मशीनरी की कार्रवाइयों में हत्याएँ, बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों द्वारा घातक हथियारों का प्रयोग और नागरिकों के अधिकारों का व्यवस्थित उल्लंघन हुआ। अभियोजन पक्ष ने यह तर्क दिया कि निर्णय-निर्माण स्तर पर दिशा-निर्देश और आदेश ऐसे थे जिन्होंने लोकतांत्रिक आंदोलन को कुचलने में निर्णायक भूमिका निभाई। अभियुक्त के खिलाफ केस और आरोपों का विवरण ट्रिब्यूनल के लिखित फैसले में विस्तृत रूप से दर्ज है, जिसपर अदालत ने दोषसिद्धि की आधारशिला रखी (Financial Times; The Guardian).

क्या यह ट्रायल पारंपरिक रूप से चला — अनुपस्थिति में सुनवाई (in absentia) का प्रश्न

यह मुक़दमा अनुपस्थित अभियुक्त की स्थिति में चला, क्योंकि शेख हसीना फिलहाल देश के बाहर हैं। अदालत ने अनुपस्थिति के बावजूद सुनवाई पूरी की और दोषसिद्धि सुनाई। इस तरह की सुनवाईयों पर अक्सर कानूनी और नीतिगत बहस होती है क्योंकि दोषसिद्धि के बाद अपील और पुनर्विचार की प्रक्रिया कई मामलों में गिरफ्तारी या समर्पण से जुड़ी होती है। बांग्लादेशी कानून के तहत दोषी ठहराए जाने पर अपीलीय मार्ग उपलब्ध हैं, परन्तु उन मार्गों का उपयोग तब तक कठिन होता है जब तक अभियुक्त जेल या न्यायालय की पहुंच में न हो (Hindustan Times; NDTV).

राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

फैसले के बाद हसीना के समर्थक तथा राजनीतिक दलों ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध और पक्षपातपूर्ण न्यायप्रणाली करार दिया। वहीं अनेक मानवाधिकार संगठन और कुछ वैश्विक मंचों ने ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया, साक्ष्य-प्रक्रिया और अनुपस्थिति में सुनवाई के पहलुओं पर सवाल उठाए हैं और निष्पक्षता की पुनःपड़ताल की मांग की है। देशों और अंतरराष्ट्रीय निकायों की प्रतिक्रिया मिश्रित रही — कुछ ने कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करने का आह्वान किया, जबकि अन्य ने सुनवाई और सजा के तरीकों पर चिंता व्यक्त की (Al Jazeera; The Guardian).

कानूनी आगे की राह: अपील, प्रत्यर्पण और दीर्घकालिक प्रभाव

दोषसिद्धि के बाद कानूनी प्रक्रिया में अपील और पुनर्विचार के विकल्प मौजूद हैं, पर इनका उपयोग तभी प्रभावी होगा जब अभियुक्त न्यायिक श्रेणी की पहुँच में हों। बांग्लादेश की सरकार ने कुछ अंतरराष्ट्रीय चैनलों के माध्यम से यह संकेत दिया है कि उसने संबंधित देशों से प्रत्यर्पण की मांग उठाई है। प्रत्यर्पण और विदेश नीति के यह पहलू द्विपक्षीय रिश्तों पर प्रभाव डाल सकते हैं और क्षेत्रीय कूटनीति में नवीन चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं (Business Today).

दीर्घकालिक रूप से यह फैसला बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति, न्यायिक स्वतंत्रता पर अंतरराष्ट्रीय छवि और मानवाधिकार-आधारित आलोचनाओं के परिप्रेक्ष्य में अहम मोड़ साबित हो सकता है। राजनीतिक प्रतिदल में टूट-फूट, न्यायिक आलोचना और आम जनता की प्रतिक्रिया मिलकर भविष्य के सरकारी संचालन और अंतरराष्ट्रीय सम्बन्धों को प्रभावित कर सकती हैं (Financial Times; Times of India).

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यह मामला संवेदनशील, बहु-स्तरीय और व्यापक निहितार्थों वाला है। कोर्ट के कागजात, मीडिया रिपोर्टिंग और विशेषज्ञ टिप्पणियों के आधार पर कहा जा सकता है कि दोषसिद्धि ने बांग्लादेश के राजनीतिक परिदृश्य में एक नया, जटिल अध्याय जोड़ दिया है। अगला चरण कानूनी अपील, सम्भावित प्रत्यर्पण चर्चाएँ और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया तय करेगी कि यह फैसला किस तरह से लंबे समय तक प्रभाव डालता है। इस मामले में स्वतंत्र और पारदर्शी कानूनी प्रक्रियाओं की निगरानी और संबंधित पक्षों द्वारा संगठित संवाद समय की मांग है, ताकि कानून, न्या और राजनीतिक स्थिरता के संतुलन को बनाए रखा जा सके (Al Jazeera; NDTV; The Guardian; Financial Times; Hindustan Times).

Sumrit Shaw

Sumrit Shaw sindhkhabar.com के एक युवा और ऊर्जावान हिंदी पत्रकार व कंटेंट क्रिएटर हैं। वे निष्पक्ष और गहराईपूर्ण खबरों के लिए जाने जाते हैं। समसामयिक विषयों, राजनीति और समाजिक मुद्दों पर उनकी लेखनी हमेशा तथ्यपूर्ण व पाठकों के लिए उपयोगी रहती है।

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